लेखनी कहानी -01-Feb-2023
भीड़
मोहन को खटक रहा था शुभचिन्तकों का युं पनपना। जो लोग मुड़ कर देखते भी नहीं थे, वही लोग आज खैरियत पुछ रहे थे। पड़ोस के जीवन काका ने कहा ’’ अरे कैसा है तू, तुमको कोई भी जरूरत हो तो बेहिचक कहना। ’’
कजरी काकी ने कहा ’’ कैसा है बेटा, देख तो आज मैंने तूम्हारे लिए गाजर का हलूवा और मटर का परांठा बनाया है। ’’
इन्द्र सेठ ने कहा ’’ बेटा, अगर रूपया की जरूरत आ पड़े तो दिल छोटा मत करना और अपने बच्चे से ब्याज की बात क्या करना। ’’
शुभचिन्तकों की बातांे से मोहन को आधी आशंका और आधी प्रशंसा का आभाष हुआ। मोहन ने अभी खुद पे इतराना ही शुरू किया था तभी अफवाह उड़ी कि ’’ लाॅटरी, ब्रजराजपूर वाले मोहन की नहीं बल्कि चक्रधरपरू वाले मोहन की लगी है। ’’ और अगले ही पल सत्यता की पुष्टि भी हो गई। अब मोहन के पास से शुभचिन्तकों की भीड़ खत्म हो गई और मोहन बेचारा से बढ़कर बदनाम हो गया।
समाप्त
सृष्टि सुमन
03-Feb-2023 05:05 PM
Behtarin rachana
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अदिति झा
03-Feb-2023 01:10 PM
Nice 👍🏼
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प्रत्यंगा माहेश्वरी
02-Feb-2023 10:39 PM
Nice post
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